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मध्य पूर्व में सैन्य संघर्ष के चलते पाकिस्तान में पेट्रोल 300 रुपए के पार

इस्लामाबाद। मध्य पूर्व में गहराते सैन्य संघर्ष और ईरान युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने का डर है। इस संकट से पाकिस्तान भी अछूता नहीं है। ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर मंडराते खतरे को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने कड़े आर्थिक फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। पाकिस्तानी सरकार ने हाई-ऑक्टेन प्रीमियम पेट्रोल पर पेट्रोलियम डेवलपमेंट लेवी में भारी बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। इस टैक्स को 100 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर सीधा 300 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है।

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक 200 रुपए प्रति लीटर की यह बढ़ोतरी विशेष रूप से हाई-एंड इम्पोर्टेड कारों का इस्तेमाल करने वाले अमीर वर्ग को ध्यान में रखकर की गई है। सरकार का अनुमान है कि इस टैक्स से खजाने में हर महीने करीब 9 अरब रुपए का अतिरिक्त राजस्व आएगा। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने इस नीति का बचाव करते हुए स्पष्ट किया है कि आम जनता द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सामान्य पेट्रोल की कीमतों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा और इसका बोझ केवल आर्थिक रूप से संपन्न लोग ही उठाएंगे।

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एक ताजा रिपोर्ट ने सरकार को आगाह किया है कि अगर ईरान और पश्चिमी देशों के बीच चल रहे सैन्य टकराव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कोई भी बाधा आती है, तो पाकिस्तान में भारी आर्थिक उथल-पुथल मच सकती है। पाकिस्तान एक्सपोजर ने रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि खाड़ी क्षेत्र में पनपा कोई भी भू-राजनीतिक तनाव पाकिस्तान के लिए एक घरेलू वित्तीय संकट का रूप ले सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज में अगर हल्की सी भी रुकावट आती है, तो कुछ ही महीनों में पाकिस्तान की महंगाई दर 9फीसदी के करीब पहुंच सकती है। गंभीर झटके की स्थिति में यह 12फीसदी के आंकड़े को भी पार कर जाएगी।

ऊर्जा संकट के बीच पाकिस्तान में बढ़ती तेल की कीमतें, माल ढुलाई का खर्च, युद्ध-बीमा प्रीमियम और टैक्स मिलकर घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों में आग लगा देंगे। रक्षा और आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि विशेष रूप से हाई-स्पीड डीजल, जो ट्रांसपोर्ट, कृषि और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला की रीढ़ है, वह महंगाई को सबसे ज्यादा बढ़ाएगा।