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पिता से छोटा बेटा और 6 संतानों का रिकॉर्ड: 7 लाख मतदाताओं में मिली हैरान कर देने वाली गड़बड़ियाँ!

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान डेटा में ऐसी विसंगतियां सामने आई हैं, जिन्होंने निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं। जिले में करीब 7 लाख मतदाताओं के डिजिटल रिकॉर्ड में तार्किक त्रुटियां  पाई गई हैं। इनमें सबसे चौंकाने वाले मामले वे हैं जहां तकनीकी गड़बड़ी के कारण माता-पिता की उम्र उनकी संतान से भी कम दर्ज हो गई है।

डेटा में मिलीं ये 6 बड़ी विसंगतियां
बीएलओ  एप के जरिए की गई छंटनी में भोपाल और मध्यप्रदेश स्तर पर लाखों गड़बड़ियां पकड़ी गई हैं:

उम्र का गणित फेल: भोपाल में 1.19 लाख और प्रदेश में 39 लाख ऐसे मतदाता मिले हैं, जिनकी उम्र उनके माता-पिता से महज 15 साल कम या उससे भी कम दर्ज है।
असंभव आयु अंतर: करीब 18 हजार मामलों में माता-पिता की उम्र मतदाता से 50 साल से भी ज्यादा बड़ी दिखाई गई है।
रिश्तों में उलझन: दादा-दादी की उम्र पोते-पोतियों से 40 साल कम दर्ज होने के 15 हजार से ज्यादा मामले भोपाल में मिले हैं।
संतानों का रिकॉर्ड: जिले के 46 हजार मतदाताओं के रिकॉर्ड में 6 या उससे अधिक संतानें दर्ज पाई गई हैं।
नाम और जेंडर: पिता के नाम में मिसमैच और जेंडर की गड़बड़ी के भी लाखों मामले सामने आए हैं।

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क्यों हुई इतनी बड़ी गड़बड़ी?
डिजिटलाइजेशन के दौरान पुराने रिकॉर्ड को नए सॉफ्टवेयर से जोड़ने पर ये चार प्रमुख कारण सामने आए हैं:

शॉर्ट नाम का उपयोग: पुराने रिकॉर्ड में ‘डीके’ लिखा था, जिसे सॉफ्टवेयर ने नए नाम ‘देवेंद्र कुमार’ से मैच नहीं किया।
उपनाम (सरनेम) का छूटना: सरनेम न होने पर एप ने उसे अलग व्यक्ति मानकर सूची से बाहर कर दिया।
लिंक की समस्या: एक मामले में पिता ने बेटों का लिंक खुद से और बेटियों का लिंक दादा के रिकॉर्ड से जोड़ दिया, जिससे डेटा मिसमैच हो गया।
अधूरा डेटा: पिता या माता का नाम गलत टाइप होने से सॉफ्टवेयर ने रिकॉर्ड रिजेक्ट कर दिया।

अब क्या होगा? 14 फरवरी तक का अल्टीमेटम
इन विसंगतियों के कारण चुनाव आयोग को डेटा जमा करने की समय-सीमा कई बार बढ़ानी पड़ी है। अब भोपाल कलेक्टर ने 14 फरवरी तक सभी त्रुटियों को सुधारने का लक्ष्य दिया है।
2 लाख मतदाताओं को नोटिस: जिले के 181 सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। शेष बचे 2 लाख मतदाताओं को नोटिस देकर सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है।