हंडिया में पहली तेज बारिश ने खोली व्यवस्थाओं की पोल, खेल मैदान बना तालाब, आदिवासी मोहल्ले में जलभराव, खेतों में पानी और नर्मदा का बढ़ा जलस्तर!
हंडिया। गुरुवार-शुक्रवार को हुई पहली तेज बारिश ने हंडिया क्षेत्र में मानसून की दस्तक के साथ ही जल निकासी व्यवस्था और विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति भी सामने ला दी। नव-निर्मित खेल मैदान में चारों ओर पानी भर जाने से पूरा मैदान तालाब जैसा दिखाई देने लगा। वहीं आदिवासी मोहल्ले की सड़कें और गलियां जलमग्न हो गईं, जिससे लोगों के आवागमन में परेशानी हुई।
पहली ही अच्छी बारिश में नए खेल मैदान में जलभराव होना निर्माण कार्य की गुणवत्ता और जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। यदि मैदान का निर्माण तकनीकी मानकों के अनुरूप हुआ होता और पानी निकासी की समुचित व्यवस्था बनाई गई होती, तो ऐसी स्थिति शायद देखने को नहीं मिलती।
बारिश का असर आसपास के कृषि क्षेत्रों में भी दिखाई दिया। कई खेतों में पानी भर गया। वहीं लगातार हो रही बारिश के कारण मां नर्मदा का जलस्तर भी बढ़ने लगा है और नदी का प्रवाह पहले की अपेक्षा अधिक दिखाई दे रहा है।
बारिश प्रकृति का हिस्सा है, लेकिन हर वर्ष पहली ही तेज बारिश में जलभराव की स्थिति बनना यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं जल निकासी व्यवस्था और विकास कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीरता से समीक्षा की आवश्यकता है। संबंधित विभाग को चाहिए कि जलभराव वाले क्षेत्रों का तकनीकी निरीक्षण कर स्थायी समाधान सुनिश्चित करे।
साथ ही नव-निर्मित खेल मैदान में पानी भरने के कारणों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि निर्माण कार्य या रखरखाव में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होना जनहित में आवश्यक है। इससे भविष्य में ऐसी समस्याओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी।

