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सावन में विशेष महत्व राजस्थान में है दुनिया का एकमात्र 12 मुख वाला शिवलिंग, महाभारत से जुड़ी है कथा

पांडेश्वर महादेव मंदिर में विराजमान है 6 टन वजनी शिवलिंग

मकडा़ई एक्सप्रेस 24 जयपुर | सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ माना जाता है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भोलेनाथ ने इसी महीने में ग्रहण किया था। इसी आस्था के चलते लोग सावन में शिव मंदिरों के दर्शन करने जाते हैं।

राजधानी जयपुर से करीब 85 किमी दूर विराटनगर में स्थित पांडेश्वर महादेव मंदिर भी सावन में श्रद्धालुओं का खास आकर्षण केंद्र बना हुआ है। इस मंदिर की खासियत है यहां स्थापित दुनिया का एकमात्र 12 मुख वाला शिवलिंग।

पांडवों से जुड़ा है मंदिर का इतिहास

विराटनगर के पंचखंड पर्वत की चोटी पर तीन विशाल चट्टानों के बीच यह प्राचीन मंदिर स्थित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत काल में पांडवों ने 12 साल के वनवास और 1 साल के अज्ञातवास के दौरान कुछ समय इन गुफाओं में बिताया था।

कहा जाता है कि 700 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस गुफा में पांडवों ने ही शिवलिंग की स्थापना की थी। अज्ञातवास के दौरान उन्होंने अपने शस्त्र भी यहीं छिपाए थे। मंदिर के वर्तमान आचार्य के अनुसार सम्राट अशोक ने भी इस पहाड़ी पर काफी समय बिताया था।

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कैसे स्थापित हुआ 6 टन का शिवलिंग

कई वर्षों तक इस गुफा को एक अघोरी द्वारा पत्थरों से बंद कर दिया गया था। बाद में स्थानीय लोगों ने पत्थर हटाकर पूजा फिर से शुरू की। समय के साथ पुराना छोटा शिवलिंग खंडित हो गया।

2004 में खंडित शिवलिंग को विधि-विधान से विसर्जित कर नए सिरे से 6 टन वजन और सवा सात फीट ऊंचा 12 मुख वाला शिवलिंग स्थापित किया गया। यही इसे दुनिया में अनोखा बनाता है।

संतों की तपस्थली और मान्यता

मंदिर के आचार्य बताते हैं कि आज भी यहां संत और अघोरी आकर तपस्या करते हैं। शिवरात्रि और सावन के सोमवार को यहां विशेष पूजा और धार्मिक आयोजन होते हैं।

स्थानीय मान्यता है कि 12 मुख वाले शिवलिंग के दर्शन और पूजा से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसी कारण सावन महीने में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है।