पश्चिम तरसा- पूरब तरबतर, बड़े डैम 70% भरे पर मालवा-निमाड़ के तालाब अभी भी खाली
मकडा़ई एक्सप्रेस 24 भोपाल/हरदा। मध्यप्रदेश में इस बार मानसून की चाल ने सबको चौंका दिया है। सितंबर के दूसरे हफ्ते तक प्रदेश में औसत से 11% कम बारिश हुई है। मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार अब तक प्रदेश में 791.7 मिमी बारिश होनी थी, जबकि सिर्फ 707.1 मिमी यानी 27.8 इंच ही बारिश हुई है। पूरे सीजन का कोटा 37.3 इंच है, जिसे पूरा करने के लिए अभी भी 9.6 इंच बारिश की जरूरत है।
कहां हुई सबसे कम बारिश……?
सबसे खराब हालात पश्चिमी मप्र के हैं, जहाँ औसत से 16% कम पानी गिरा है। पूर्वी मप्र में कमी सिर्फ 5% है।
सबसे ज्यादा कमी वाले जिले
– अलीराजपुर – सबसे ज्यादा सूखा, सिर्फ 345 मिमी बारिश, औसत से 54% कम।
– धार – 695 मिमी की जगह 412 मिमी, 41% कम।
– हरदा – 31% कम, जिले में अब तक सिर्फ 664.7 मिमी बारिश, जबकि पिछले साल इसी तारीख तक 1018.2 मिमी हो चुकी थी।
– इसके अलावा आगर-मालवा, झाबुआ, बड़वानी, खंडवा, रतलाम, मंदसौर, नीमच, इंदौर, उज्जैन, देवास, सीहोर, बैतूल, नर्मदापुरम, रायसेन, विदिशा में 15 से 40% तक की कमी है।
– पूर्वी मप्र में बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सागर, दमोह, सिवनी, पांढुर्णा में 2 से 23% कम बारिश।
कहां पूरा हुआ पानी का कोटा…..?
12 जिलों ने अपना कोटा 101% से 146% तक पूरा कर लिया है – भोपाल, राजगढ़, शिवपुरी, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज और शहडोल। इनके अलावा अनूपपुर, बुरहानपुर, ग्वालियर, गुना, खरगोन में भी औसत से ज्यादा बारिश है।
मप्र के डैमों में कितना पानी है…..?
प्रदेश के बड़े डैमों में औसतन 70% से ज्यादा पानी भर चुका है, इसलिए कई जगह गेट खोलने पड़े हैं।
– बरगी डैम, जबलपुर – 93.33% भर गया है। जलस्तर 421.85 मीटर। 5 गेट खोलकर 760 क्यूमेक पानी नर्मदा में छोड़ा जा रहा है। घाटों पर 3-4 फीट पानी बढ़ने का अलर्ट।
– बाणसागर डैम – जलस्तर 341.58 मीटर, 6 रेडियल गेट 2-2 मीटर खोलकर 2454 क्यूमेक पानी सोन नदी में छोड़ा। सीधी के 24 गांवों में हाई अलर्ट।
– मड़ीखेड़ा और हरसी डैम, शिवपुरी – मड़ीखेड़ा 90.49% भरा, 4 गेट खुले। हरसी डैम वेस्ट वियर से डेढ़ फीट ऊपर बह रहा है।
– भोपाल के कलियासोत और भदभदा – लगातार बारिश से भोपाल का बड़ा तालाब 1666.50 फीट पर, फुल टैंक लेवल से सिर्फ 0.30 फीट नीचे। कलियासोत के 2 गेट खुले।
– बान सुजारा, टीकमगढ़ – 316.50 मीटर क्षमता के मुकाबले 315 मीटर भर गया, 8 गेट खोलकर 668 क्यूमेक पानी छोड़ा।
– माही परियोजना, धार-झाबुआ – यहाँ कमी का असर साफ दिख रहा है। उप बांध कालीकराई 3 मीटर खाली (471.30/474.30 मी.) और मुख्य बांध 5 मीटर खाली (446.45/451.50 मी.) है। सिंचाई विभाग के 59 तालाबों में से 58 में अभी भी जलस्तर नहीं बढ़ा।
इसका क्या असर पड़ेगा…..?
खरीफ फसल पर संकट – मालवा-निमाड़ जो सोयाबीन और मक्का का कटोरा है, वहाँ 40% कम बारिश से फसलें पीली पड़ने लगी हैं। किसानों को अब सितंबर के आखिरी दौर की बारिश का ही सहारा है।
भूजल स्तर नीचे- आमजन को अभी लग रहा है की बारिश बहुत हो गई है मगर हालात इससे भी अलग है जमीन को जितना पानी का भी आवश्यकता है उसे हिसाब से बारिश नहीं हुई है जमीन के अंदर पानी को अधिकतम जाना चाहिए ऐसा नहीं हुआ है भूजल स्तर अभी भी बहुत कम है जिससे आगामी दो से तीन महीना में पीने के पानी की समस्या बढ़ जाएगी इंदौर, उज्जैन, धार, हरदा में कुएं और ट्यूबवेल इस साल जल्दी जवाब दे सकते हैं।
रबी सीजन पर खतरा – यदि सितंबर में 9.6 इंच की भरपाई नहीं हुई तो रबी में गेहूं-चने की बुवाई के लिए नहरों में पानी कम मिलेगा।
पीने के पानी की चिंता – अलीराजपुर, धार, बड़वानी में अभी से नगर निगमों ने जल वितरण की योजना बनाना शुरू कर दिया है।
मौसम विभाग ने 12 सितंबर तक पूर्वी मप्र और मालवा में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। यदि यह सिस्टम सक्रिय रहा तो कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है, वरना पश्चिमी मप्र में इस साल अकाल जैसी स्थिति बन सकती है।

