jhankar
ब्रेकिंग
मर्दानपुर: नाली निर्माण विवाद में दो पक्ष आमने-सामने, दोनों ओर से एफआईआर दर्ज हरदा: ग्राम ऊडा में 18 जुलाई को होगी विशाल बैलगाड़ी दौड़ प्रतियोगिता, प्रथम पुरस्कार ₹9,000 हरदा: दो आरोपियों को जिला बदर करने के आदेश जारी शुद्ध के लिए युद्ध: मिलावटखोरों के खिलाफ अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत की जागरण रैली, कलेक्टर के नाम सौं... हनीफाबाद स्कूल में प्लास्टर गिरने से घायल छात्रा प्रियांशी से मिलने पहुंचे कलेक्टर मूंग उपार्जन को लेकर किसान उग्र, विधायक निवास के बाहर किया प्रदर्शन , विधायक ने कहा - मुख्यमंत्री से... हरदा में किसानों का उग्र आंदोलन: मूंग खरीदी और ई-टोकन व्यवस्था के विरोध में नेशनल हाईवे जाम, पहले दि... मांधाता के वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व सैनिक भीम सिंह गुर्जर को मिली बड़ी जिम्मेदारी भाजपा सैनिक प्... 15 जुलाई को MP में अपराध और दुर्घटना की ताजा खबरें टीकमगढ़: पीडीएस के गेहूं में निकली सिर की हड्डी, हड़कंप के बाद दुकान सील

बसपा का 9 बागी विधायक अखिलेश यादव से मिले, छोड़ सकते हैं मायावती का साथ

Uttar Pradesh : उत्तर प्रदेश में अगले साल यानी करीब 8 माह बाद होने वाले चुनावों से पहले बसपा सुप्रीमो मायावती को झटका लगा है। बसपा के 9 बागी विधायक लखनऊ में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिले। इनका बसपा छोड़, सपा में शामिल होना तय माना जा रहा है। जिन विधायकों ने अखिलेश से मुलाकात की, उनमें असलम राइनी (भिनगा), असलम अली चौधरी (ढोलाना), मुजतबा सिद्दीकी (प्रतापपुर), हाकिम लाल बिंद (हांडिया), हरगोविंद भार्गव (सिधौली), सुषमा पटेल (मुंगरा), वंदना सिंह (सगड़ी), रामवीर उपाध्याय (सादाबाद) और अनिल सिंह (उन्नाव) शामिल हैं।

- Install Android App -

उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा के 18 विधायक हैं, जिनमें से 9 पिछले साल राज्यसभा चुनाव से पहले बागी हो गए थे। इन्होंने दल-बदल कानून से बचने के लिए पार्टी तो नहींं छोड़ी, लेकिन अब अखिलेश यादव से मिलकर अपना सख्त रुख साफ कर दिया है। बताया जा रहा है कि इस घटनाक्रम का उत्तर प्रदेश की राजनीति पर बड़ा असर पड़ेगा। अखिलेश यादव यह संदेश देना चाहते हैं कि प्रदेश में भाजपा का मुकाबला सपा ही कर सकती है। वहीं बसपा के लिए खुद को मजबूत करना मुश्किल होगा।

यूपी में 8 माह बाद विधानसभा चुनाव होना हैं। कांग्रेस ने पहले ही प्रियंका गांधी को मैदान में भेज दिया है। वहीं इस बार बहुमुखी मुकाबला हो सकता है। एक तरफ भाजपा और उसके सहयोगी दल हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस, सपा और बसपा हैं।