मकड़ाई एक्सप्रेस 24 सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया। भैरूंदा स्थित निजी नर्मदा अस्पताल पर आदिवासी महिला के शव को रोककर वसूली करने और दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगे हैं।
इलाज के बाद भी शव देने से किया इनकार
मृतक महिला के परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन ने इलाज के नाम पर पैसे वसूलने के बावजूद शव देने से इनकार कर दिया। आरोप है कि प्रबंधन ने अतिरिक्त रकम की मांग करते हुए शव परिजनों को सौंपने से मना कर दिया। मजबूर होकर परिवार को पुलिस की मदद लेनी पड़ी।
अस्पताल कर्मियों ने पुलिस के सामने दिखाई दबंगई
जब सूचना मिलने पर भैरूंदा पुलिस मौके पर पहुंची और शव परिजनों को सौंपने की कोशिश की, तब अस्पताल कर्मचारियों और कुछ असामाजिक तत्वों ने पुलिस के सामने ही दबंगई दिखाई। घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है।
सड़क हादसे में घायल हुई थी फूलवती बाई
जानकारी के अनुसार, मंगलवार-बुधवार की रात सनकोटा मार्ग पर एक सड़क हादसे में 22 वर्षीय फूलवती बाई पति छोटेलाल बारेला गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। परिजन उन्हें देर रात इलाज के लिए नर्मदा अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। अस्पताल ने पुलिस को सूचना दी, लेकिन शव सौंपने से इनकार कर दिया।
प्रशासन और अस्पताल के बीच टकराव
भैरूंदा पुलिस के अनुसार, महिला की मौत के बाद मर्ग कायम कर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया था। पुलिस ने बताया कि उपचार से जुड़े पैसों को लेकर मृतका के परिवार और अस्पताल प्रबंधन के बीच विवाद था, जिसे बाद में सुलझा लिया गया।
राजनीतिक रसूख पर उठे सवाल
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि नर्मदा अस्पताल एक भाजपा नेता से जुड़ा है, जिसके कारण अस्पताल प्रबंधन अक्सर मनमानी करता है। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने अस्पताल की जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन का बयान
बीएमओ मनीष सारस्वत ने कहा कि अब तक इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है। वहीं, एसडीओपी रोशन जैन के मुताबिक सिंहपुर के पास हुए सड़क हादसे में घायल महिला को अस्पताल लाया गया था, जहां उसकी मौत हो गई। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है।
जनता में आक्रोश, कार्रवाई की मांग
इस घटना से क्षेत्र में भारी नाराजगी फैल गई है। लोगों का कहना है कि अस्पताल ने मानवता की सारी सीमाएं लांघ दी हैं। अब सभी की नजरें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या अस्पताल प्रबंधन पर कड़ी कार्यवाही होगी या मामला यूं ही ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

