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ग्रामीण भारत के लिए ऐतिहासिक बजट — विकास, सम्मान और आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव: अशोक गुर्जर

पूर्व जिला प्रवक्ता, भारतीय जनता पार्टी, हरदा

हरदा: केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा प्रस्तुत नवीनतम केंद्रीय बजट भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास में ग्रामीण भारत के लिए अब तक का सबसे व्यापक, संतुलित और दूरदर्शी बजट है। ₹53 लाख करोड़ के कुल केंद्रीय बजट में से ₹15 लाख करोड़ से अधिक राशि प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से ग्रामीण विकास, कृषि, किसान, मजदूर और ग्रामीण महिलाओं के कल्याण पर व्यय की जा रही है, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

 जारी प्रेस विज्ञप्ति में अशोक गुर्जर 

पूर्व जिला प्रवक्ता, भारतीय जनता पार्टी हरदा ने कहा कि

केंद्र आमतौर पर ग्रामीण बजट को केवल ग्रामीण विकास मंत्रालय या कृषि मंत्रालय के आंकड़ों तक सीमित करके देखा जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि ग्रामीण भारत पर होने वाला व्यय कई मंत्रालयों और योजनाओं में विभाजित होता है।

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इस बजट में कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण आवास, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर नल-जल, खाद्य एवं उर्वरक सब्सिडी, ग्रामीण बिजली व्यवस्था, कृषि पंपों की बिजली सब्सिडी, सोलर पंप एवं फीडर सोलराइजेशन तथा जन-धन खातों के माध्यम से महिलाओं और गरीबों को दी जाने वाली प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजनाएँ शामिल हैं।

इन सभी मदों को समग्र रूप से देखा जाए तो यह स्पष्ट होता है कि ग्रामीण भारत सरकार की प्राथमिकता के केंद्र में है। इस बजट का उद्देश्य केवल योजनाएँ घोषित करना नहीं, बल्कि गाँवों में स्थायी अधोसंरचना, रोजगार के अवसर, किसान की आय में वृद्धि और ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार सुनिश्चित करना है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से गाँवों को बाजार और शहरों से जोड़ा जा रहा है, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) से गरीबों को पक्का मकान मिल रहा है, जल जीवन मिशन से महिलाओं की वर्षों पुरानी जल समस्या का समाधान हो रहा है, और कृषि एवं ऊर्जा क्षेत्र में सोलराइजेशन से किसानों को सस्ती और स्थायी ऊर्जा उपलब्ध हो रही है।

यह बजट यह भी दर्शाता है कि भाजपा सरकार का विकास मॉडल “गाँव से राष्ट्र निर्माण” की सोच पर आधारित है, जहाँ किसान, मजदूर और ग्रामीण समाज को केवल सहायता का पात्र नहीं बल्कि देश के विकास का साझेदार माना गया है। इस बड़े निवेश से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, पलायन रुकेगा और आत्मनिर्भर गाँवों के निर्माण की दिशा में देश तेज़ी से आगे बढ़ेगा।

निश्चित रूप से यह केंद्रीय बजट नया भारत, सशक्त भारत और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की परिकल्पना को साकार करने वाला बजट है, जिसे आने वाले वर्षों में ज़मीनी स्तर पर साफ़-साफ़ देखा जा सकेगा।