चुरनी के घायल को ग्रामीणों ने झोली में उठाकर पहुंचाया, ट्रैक्टर से सिराली ले जाने के बाद हरदा किया गया रेफर !
हरदा/सिराली। प्रदेश सरकार द्वारा आमजन, विशेषकर गरीब और जरूरतमंद लोगों को समय पर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए एंबुलेंस सेवा संचालित की जा रही है। सरकार की मंशा है कि गंभीर मरीजों को बिना देरी अस्पताल पहुंचाया जाए, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्था में लापरवाही के मामले सामने आने से सरकार की मंशा और व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बीते दिन जिले के ग्राम चुरनी में करीब 50 वर्षीय आदिवासी व्यक्ति लालमन पेड़ से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया।
परिजनों द्वारा एंबुलेंस के लिए संपर्क किए जाने के बावजूद समय पर सुविधा नहीं मिलने की बात सामने आई। इसके बाद ग्रामीण घायल को झोली में कंधे पर और लकड़ी के सहारे लेकर गांव से बाहर पहुंचे। बाद में ट्रैक्टर की मदद से उसे सिराली ले जाया गया। सिराली में प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत को देखते हुए घायल को हरदा रेफर किया गया।
पूर्व में भी सामने आ चुके हैं मामले
स्थानीय स्तर पर एंबुलेंस व्यवस्था को लेकर पूर्व में भी शिकायतें और खबरें सामने आती रही हैं। कई बार एंबुलेंस वाहनों के ड्राइवरों की कॉलोनियों अथवा घरों के सामने खड़े रहने की बात भी सामने आई।
लोगों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है।
इस मामले में एंबुलेंस व्यवस्था की निगरानी करने वाले सुपरवाइजर सुनील कुमार धाकड़ की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। उनसे व्यवस्था का सफल संचालन नहीं हो पा रहा है।
जयस ने की कार्रवाई की मांग
जयस के जिला प्रभारी राकेश काकोड़िया ने जिला प्रशासन से मामले की जांच कर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि शासन द्वारा गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए संचालित एंबुलेंस सेवा का लाभ उन्हें समय पर मिलना चाहिए। व्यवस्था में लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
सीएमएचओ बोले—लापरवाही पर जारी होगा नोटिस
सीएमएचओ डॉ. एचपी सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि एंबुलेंस व्यवस्था में लापरवाही की जांच कराई जाएगी। लापरवाही सामने आने पर संबंधित को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।
सरकार की छवि पर भी असर
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार द्वारा लगातार व्यवस्थाएं बेहतर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में यदि जरूरत के समय एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होती है तो इसका सीधा असर मरीज और उनके परिजनों पर पड़ता है। साथ ही जमीनी स्तर पर सामने आने वाली ऐसी शिकायतों से शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल उठते हैं। अब देखना होगा कि जांच के बाद प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।

