इंदौर। देश में दलहन फसलों के लगातार घटते रकबे और उत्पादन को लेकर केंद्र व राज्य सरकारें चिंतित हैं। इसी कड़ी में दलहन उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से 7 फरवरी को मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के अमलाहा गांव स्थित इक्राडा (ICARDA) परिसर में दलहन फसलों पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन में देश के 10 राज्यों के कृषि मंत्री शामिल होंगे।
सम्मेलन में होगी भविष्य की संभावनाओं पर व्यापक चर्चा
सम्मेलन का उद्देश्य दलहन क्षेत्र से जुड़ी मूल संवेदनाओं, मौजूदा चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर व्यापक चर्चा करना है, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर दलहन विकास के लिए ठोस रणनीति तैयार की जा सके। सम्मेलन के बाद राष्ट्रीय स्तर पर दलहन विकास को लेकर ठोस रोडमैप तैयार किए जाने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश लंबे समय से देश का सबसे बड़ा दलहन उत्पादक राज्य बना हुआ है। चना, मसूर और उड़द जैसी फसलों में राज्य की हिस्सेदारी करीब 22–24 प्रतिशत है। इसके बाद महाराष्ट्र और राजस्थान आते हैं, जहां अरहर, मूंग और चना प्रमुख फसलें हैं।
उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात जैसे राज्य दूसरे स्तर के प्रमुख उत्पादक हैं, जिनका संयुक्त योगदान राष्ट्रीय उत्पादन में लगभग 20–25 प्रतिशत है। वहीं पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में दलहन की खेती सीमित है, हालांकि यहां उत्पादन बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री भी होंगे शामिल
किसान सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंषाना भी शिरकत करेंगे। सम्मेलन में कृषि विशेषज्ञ दलहन उत्पादन को सुदृढ़ करने, किसानों की आय बढ़ाने और उन्नत तकनीकों के माध्यम से उत्पादकता सुधार पर अपने विचार साझा करेंगे।
किसानों को मिलेगी नई तकनीक और बाजार की जानकारी
सम्मेलन में देशभर के कृषि वैज्ञानिक, वरिष्ठ अधिकारी, सरकारी बीज उत्पादक संस्थाएं, दाल उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि और अन्य सहयोगी एजेंसियां भाग लेंगी। इस सम्मेलन में चयनित किसानों को भी आमंत्रित किया गया है. यहां किसानों तक नवीन शोध, गुणवत्तापूर्ण बीज, आधुनिक खेती पद्धतियां और बाजार से जुड़ी अहम जानकारियां पहुंचाई जाएंगी. विभिन्न राज्यों के मंत्री अपने-अपने राज्यों के अनुभवों का आदान-प्रदान भी करेंगे।

