तीसरे वर्ष भी युवा मित्र मंडल की आस्था का कारवां रवाना, महिला शक्ति और युवाओं की सहभागिता ने बढ़ाई यात्रा की रौनक,,,
हंडिया। हाथों में मां के नाम की चुनरी, साथ में ध्वज और मन में अटूट श्रद्धा… कुछ इसी भाव के साथ बुधवार को हंडिया के सड़क घाट से मां बिजासन मैया के भक्त सलकनपुर स्थित माता के दरबार के लिए रवाना हुए। युवा मित्र मंडल सड़क घाट हंडिया द्वारा निकाली गई इस धार्मिक यात्रा में 51 मीटर की चुनरी और ध्वज मां के चरणों में अर्पित करने के लिए ले जाए जा रहे हैं। खास बात यह है कि मंडल द्वारा लगातार तीसरे वर्ष इस परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है।
यात्रा में वरिष्ठ समाजसेवी नर्मदा प्रसाद चौरसिया, ओमप्रकाश केवट, मनीष चौहान, आकाश केवट सहित बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं और युवतियां शामिल हुईं। सभी श्रद्धालु उत्साह और भक्तिभाव के साथ माता के दरबार की ओर रवाना हुए।
युवा मित्र मंडल की यह पहल धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ युवाओं को अपनी संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने का संदेश भी दे रही है। लगातार तीसरे वर्ष निकाली जा रही यह यात्रा मंडल के सदस्यों की श्रद्धा और सामूहिक सहभागिता को दर्शाती है।
इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी नर्मदा प्रसाद चौरसिया ने कहा कि धार्मिक आयोजनों की सार्थकता तभी है, जब उनके माध्यम से समाज में प्रेम, सद्भाव और एकता की भावना मजबूत हो। युवाओं का अपनी धार्मिक परंपराओं से जुड़ना और उन्हें निरंतर आगे बढ़ाना समाज के लिए सकारात्मक संकेत है।
उन्होंने कहा कि मां के प्रति श्रद्धा व्यक्ति को सेवा, समर्पण और सद्भाव की प्रेरणा देती है। ऐसे आयोजनों में महिलाओं, युवतियों और युवाओं की सहभागिता से सामाजिक एकजुटता को बल मिलता है। हमारी कोशिश होनी चाहिए कि आने वाली पीढ़ी भी अपनी संस्कृति और परंपराओं के महत्व को समझे और उन्हें सहेजकर रखे।
हंडिया से सलकनपुर तक मां बिजासन मैया के दरबार के लिए निकली यह यात्रा श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। 51 मीटर की चुनरी और ध्वज अर्पित करने की भावना के साथ निकले श्रद्धालु माता का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आगे बढ़े।
मां के प्रति श्रद्धा, युवाओं का समर्पण और समाज की सामूहिक सहभागिता—यही इस धार्मिक यात्रा की पहचान है।

