मुंबई। भारत ने नवंबर महीने में रूस से कच्चे तेल की खरीद में भारी बढ़ोतरी की है। एक यूरोपीय थिंक टैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने नवंबर में रूस से लगभग 2.6 बिलियन यूरो मूल्य का कच्चा तेल खरीदा। यह आंकड़ा अक्टूबर की तुलना में करीब 4 प्रश ज्यादा है और 5 महीने का सबसे ऊंचा स्तर भी है। भारत ने रूस से खरीदे गए इन बैरल्स में से बड़ी मात्रा को रिफाइन कर ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों को एक्सपोर्ट भी किया।
भारत बना रूस का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार
रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा रूस का तेल खरीदने वाला देश चीन, दूसरे स्थान पर भारत, तीसरे स्थान पर तुर्की और यूरोप हैं । यानी अकेले चीन और भारत मिलकर रूस का लगभग 85 प्रश फॉसिल फ्यूल खरीद रहे हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि युद्ध से पहले रूस का हिस्सा भारत के कुल तेल आयात में 1 प्रश से भी कम था। अब यही हिस्सा बढ़कर 40 प्रश के पीक स्तर तक पहुंच चुका है। इसकी वजह है भारी डिस्काउंट पर मिलने वाला रूसी तेल।
भारत का रूसी तेल सिर्फ घरेलू इस्तेमाल के लिए नहीं
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। खरीदा गया तेल सिर्फ पेट्रोल-डीजल बनाने में ही नहीं जाता, बल्कि इसका बड़ा हिस्सा विदेशों को रिफाइंड फ्यूल के रूप में एक्सपोर्ट भी होता है। नवंबर में भारत और तुर्की की कुल 6 रिफाइनरियों ने 807 मिलियन यूरो के रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट किए। इनमें से यूरो 301 मिलियन का फ्यूल रूसी कच्चे तेल से तैयार किया गया था।
रिपोर्ट में बताया गया कि नवंबर में भारत से ऑस्ट्रेलिया को भेजा गया फ्यूल एक्सपोर्ट 69 प्रश बढ़ा। यह सारा फ्यूल रिलायंस जामनगर रिफाइनरी से भेजा गया। इसके अलावा कनाडा को भी 8 महीने के अंतराल के बाद ऐसे शिपमेंट मिले जिनमें रूसी तेल से तैयार फ्यूल था। यूरोपीय यूनियन ने रूसी तेल या रूसी तेल से बने फ्यूल के आयात पर प्रतिबंध लगा रखा है। लेकिन अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने ऐसा कोई प्रतिबंध लागू नहीं किया है। यही वजह है कि भारतीय रिफाइनरियाँ वहाँ आसानी से फ्यूल एक्सपोर्ट कर पा रही हैं।

