यह एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और कानूनी घटनाक्रम है। मंत्री विजय शाह द्वारा दोबारा मांगी गई माफी स्पष्ट रूप से सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख का परिणाम दिखाई दे रही है।
मकड़ाई एक्सप्रेस 24 इंदौर। मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कुंवर विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई अपनी विवादित टिप्पणी के लिए एक बार फिर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। शुक्रवार को इंदौर की रेसीडेंसी कोठी पहुंचे मंत्री शाह ने मीडिया के माध्यम से अपनी सफाई पेश की और कहा कि उनकी मंशा कभी भी सेना या किसी महिला अधिकारी का अपमान करने की नहीं थी।
“देशभक्ति के जोश में हुई गलती” – विजय शाह
अपनी सफाई देते हुए विजय शाह ने कहा, *”मेरे शब्द देशभक्ति के जोश और उत्साह में निकल गए थे। मेरा इरादा गलत नहीं था, लेकिन मैं अपनी इस गलती की पूरी जिम्मेदारी लेता हूँ।”* उन्होंने आगे कहा कि सार्वजनिक जीवन में शब्दों की मर्यादा का महत्व वह समझते हैं और इस घटना से उन्होंने सबक सीखा है। उन्होंने भारतीय सेना के प्रति अपने सम्मान को दोहराते हुए भविष्य में सतर्क रहने का आश्वासन दिया।
महू में दिया था विवादित बयान
यह पूरा विवाद 11 मई को इंदौर के महू स्थित रायकुंडा गांव में आयोजित एक कार्यक्रम से शुरू हुआ था। इस दौरान मंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस बयान के बाद सेना के पूर्व अधिकारियों और राजनीतिक गलियारों में भारी आक्रोश देखा गया था।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख और ‘देरी’ पर सवाल
विजय शाह की यह माफी ऐसे समय में आई है जब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है।19 जनवरी की सुनवाई।कोर्ट ने शाह की माफी को “देर से उठाया गया कदम” बताया था। पब्लिक फिगर की जिम्मेदारी कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि एक जन प्रतिनिधि होने के नाते उन्हें शब्दों के चयन में अधिक गंभीर होना चाहिए था। अभियोजन में देरी पर मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा कि अगस्त 2025 में SIT जांच पूरी होने के बावजूद अब तक अभियोजन (Prosecution) की मंजूरी क्यों नहीं दी गई।
9 फरवरी की सुनवाई पर टिकी नजरें
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दो हफ्ते के भीतर निर्णय लेने और अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। 9 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई। इस मामले में निर्णायक साबित हो सकती है, क्योंकि राज्य सरकार को कोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि वह मंत्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को लेकर क्या कदम उठा रही है।
> इस मामले में कानूनी प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है, जहाँ सरकार को SIT की रिपोर्ट और कोर्ट के निर्देशों के बीच संतुलन बनाना होगा।

