उज्जैन। सावन माह के चौथे और अंतिम सोमवार को उज्जैन में भगवान महाकाल की राजसी सवारी धूमधाम से निकाली गई। दिन की शुरुआत मंदिर सभा मंडप में भगवान की पालकी पूजन से हुई, जहां श्रद्धा और भक्ति का अनोखा संगम देखने को मिला। पालकी पूजन के बाद जब भगवान महाकालेश्वर की सवारी मंदिर के मुख्य द्वार से निकली, तो वहां मौजूद सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने पालकी में विराजित महाकाल को पूरे सम्मान के साथ सलामी दी। इस दौरान मंदिर परिसर ‘जय महाकाल’ के नारों से गूंज उठा। साथ ही अन्य जिलों में भी सावन विशेष पूजा और कांवड़ यात्रा का आयोजन किया गया।
बाबा महाकाल के नगर भ्रमण का हर स्वरूप खास
सावन माह के अंतिम सोमवार शाम 4 बजे महाकाल भक्तों का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकले। सवारी में भगवान महाकाल ने विभिन्न स्वरूपों के भक्तों को दर्शन दिए, पालकी में श्री महाकालेश्वर, श्री चंद्रमोलेश्वर स्वरूप में, गजराज पर श्री मनमहेश रूप, गरुड रथ पर श्री शिव तांडव प्रतिमा, नंदी रथ पर श्री उमा-महेश जी स्वरूप में भक्तों को दर्शन देने निकले। सावन की चौथी सवारी में भजन मंडलियों, झांझ वादन समूहों और लोक कलाकारों ने अपनी भक्ति-पूर्ण प्रस्तुतियों से वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। वहीं, घुड़सवार पुलिस, सशस्त्र बल, होमगार्ड जवानों और पुलिस बैंड ने सवारी को सुरक्षा और गरिमा के साथ आगे बढ़ाया। भक्तों ने पूरे उल्लास और आस्था के साथ भगवान महाकाल का दर्शन किया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
अंतिम सोमवार को महाकाल का अलौकिक श्रृंगार
सावन माह के अंतिम सोमवार की पवित्र सुबह उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भक्ति की लहरें उमड़ पड़ीं। तड़के ढाई बजे मंदिर के कपाट भस्म आरती के लिए खोले गए। सबसे पहले भगवान महाकाल को जल अर्पित कर भस्म रमाई गई और फिर दूध-दही से स्नान कराने के बाद पंचामृत अभिषेक पूजन हुआ। इसके बाद भगवान महाकाल का भांग, चंदन और दिव्य आभूषणों से राजा स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया। महाकाल का यह अद्भुत रूप देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

