नई दिल्ली। NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी को लेकर पिछले 36 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी का हवाला देते हुए इस्तीफा प्रधानमंत्री को भेजा।
सूत्रों के अनुसार उन्होंने 5 दिन पहले ही इस्तीफे की पेशकश कर दी थी, लेकिन जब आंदोलन देशभर में तेज हुआ तो सरकार को फैसला लेना पड़ा।
आंदोलन खत्म, सरकार ने मानी ये मांगें
जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शनकारियों ने शनिवार शाम आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की। सरकार ने आश्वासन दिया है कि:
– NEET पेपर लीक के आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई होगी
– पीड़ित छात्रों के परिजनों को मुआवजा दिया जाएगा
– भविष्य में ऐसे मामलों में किसी प्रदर्शनकारी पर केस दर्ज नहीं किया जाएगा
प्रहलाद जोशी को मिला शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार
मंत्री के इस्तीफे के बाद संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
70 दिन में सोशल मीडिया और कोर्ट की टिप्पणी से बना दबाव
छात्रों के इस आंदोलन की शुरुआत NEET में गड़बड़ी और कुछ छात्रों की आत्महत्या की खबरों के बाद सोशल मीडिया पर Reels और Memes के जरिए हुई। सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी ने भी आंदोलन को हवा दी। 15 मई से 25 जुलाई तक चले इस आंदोलन में कई दौर की बातचीत और प्रदर्शन हुए।
सरकार का अगला फोकस: मानसून सत्र
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद अब सरकार का ध्यान संसद के मानसून सत्र पर होगा। इसमें 2026 की जनगणना, जजों की संख्या बढ़ाने और शिक्षा से जुड़े नए बिल लाए जा सकते हैं।
आंदोलनकारियों और परिजनों की प्रतिक्रिया
आंदोलन से जुड़े छात्रों का कहना है कि यह “युवा शक्ति की जीत” है। प्रदर्शन में शामिल एक छात्र के माता-पिता ने कहा कि पिछले 40 दिन से परिवार चैन से नहीं सो पाया था। इस्तीफे की खबर सुनते ही सबकी आंखें भर आईं।
क्या खास रहा
– 36 दिन चला जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
– 47 अधिकारियों पर अब तक कार्रवाई
– 6 जून को शुरू हुआ था आंदोलन
– सरकार ने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का भी ऐलान किया

